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यूपी विधानसभा चुनाव में कैसी होगी एआईएमआईएम की रणनीति, किसे दिया जाएगा टिकट? ओवैसी ने बताया

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Owaisi On UP Elections: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी पूरे जोर शोर के साथ मैदान में उतर रही है. एआईएमआईएम यहां की सौ विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों को उतारने का फैसला किया है. एबीपी न्यूज़ के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत करते हुए एआईएमएआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि बताया कि यूपी चुनाव को लेकर आखिर उनकी पार्टी की क्या सियासी रणनीति रहेगी. ओवैसी ने कहा कि हमारी पार्टी ने कहा है कि हम 100 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे और ऐसा कोई जरूरी नहीं है कि केवल मुसलमानों को ही टिकट देंगे, बल्कि सारी बिरादरी के लिए हम तैयार हैं.

एआईएमआईएम चीफ ने आगे कहा कि अगर हमें कोई राजनीतिक तौर पर अछूत समझता है तो फिर जनता तय करेगी. ओवैसी न कहा कि हमारी शिवपाल सिंह यादव और चंद्रशेखर रावण से बात चल रही है. बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन के सवाल पर  उन्होंने कहा कि ओपी राजभर ने हम से गठबंधन क्यों तोड़ा यह तो वही बताएंगे मैं कैसे बता सकता हूं.

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि मैं अगर बीजेपी की बी टीम हूं तो 2014 , 2017 और 2019 में बीजेपी कैसे जीत गई. तब तो मैं नहीं था उत्तर प्रदेश में. उन्होंने कहा कि अगर तृणमूल कांग्रेस असम की कांग्रेस नेता को अपने पाले में ले आती हैं या लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ममता बनर्जी के बारे में कुछ बोलते हैं तब तो उन्हें कोई बीजेपी की बी टीम नहीं कहता. उन्होंने कहा कि कोई पार्टी नहीं चाहती है कि देश में मुसलमानों का एक लीडरशिप तैयार हो उनसे बस वह चाहती हैं.

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पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का योग में ज्यादा भरोसा, सर्वे में सामने आई ये बात

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Women believe in Yoga More Than Men : आजकल के भागदौड़ भरे लाइफस्टाइल (Lifestyle) में अपनी सेहत का ख्याल रखना बहुत जरूरी हो गया है. वैसे तो हमें अपनी सेहत की देखभाल के लिए टाइम मिलता नहीं है, लेकिन अगर हम ऐसा नहीं करेंगे तो ये काफी नुकसानदायक हो सकता है. एक जगह पर घंटों बैठे रहकर काम करने, अनियमित खानपान और बिलकुल भी एक्सरसाइज (Exercise) नहीं करने से कई बीमारियां बिना कुछ बताए हमारे शरीर में घर कर जाती है.

आज के दौर में हाई ब्लड प्रेशर, मोटापे और शुगर को किसी बुलावे की जरूरत नहीं है. बस आपका आलस ही इसके लिए काफी है. वैसे तो ये बात महिला और पुरुष दोनों पर लागू होती है, लेकिन दैनिक भास्कर अखबार में छपी न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं की औसत आयु पुरुषों से ज्यादा होती है, ये बात साबित हो चुकी है, लेकिन अब यह भी दिख रहा है कि महिलाएं बेहतर सेहत पाने की कोशिश में लगी हैं, वे परिवार वालों की फिटनेस के साथ साथ अब अपनी हेल्थ पर भी ध्यान दे रही हैं. इस काम में योग उनकी मदद कर रहा है.

योग करने वाली महिलाओं की संख्या 20 प्रतिशत अधिक

इस रिपोर्ट के मुताबिक, देश में योग करने वाली महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में अधिक दिख रही है. ट्रेडिंग बॉडी एसोचैम (ASSOCHAM) की ओर से किए गए सर्वे में यह बात सामने आई है. इस सर्वे के अनुसार देश के शहरी क्षेत्रों की अगर बात करें तो वहां पर योग करने वाले पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या 20 प्रतिशत अधिक है.

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किन शहरों में किया गया सर्वे
एसोचैम ने इस सर्वे के नतीजे जारी करते हुए कहा, देश में योग करने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है. कोविड के बाद इस संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है. ये सर्वे देश के 10 शहरों, अहमदाबाद, बेंगलुरू, चेन्नई, दिल्ली-एनसीआर, हैदराबाद, इंदौर, जयपुर, कोलकाता, लखनऊ और मुंबई में किया गया.

इस सर्वे में ये निकलकर आया कि महिलाएं योग को जिम जाने से ज्यादा पसंद कर रही हैं. वे एक बार इससे जुड़ने के बाद इसे अपने डेली रुटीन में ला रही हैं. मुरादाबाद में नमस्ते योगा स्टूडियो (Namaste Yoga Studio) के योगाचार्य महेंद्र चौहान (Yogacharya Mahendra Chauhan) का कहना है कि हमारे यहां महिला और पुरुष दोनों आते हैं, लेकिन महिलाओं की संख्या ज्यादा है.

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उन्होंने बताया कि सुबह की शिफ्ट में ज्यादातर वर्किंग वुमेन और दिन में गृहणी फिटनेस के लिए योग करती हैं. उनका कहना है कि गृहणी यानि हाउसवाइफ ज्यादातर वजन कम करने में रुचि दिखाती हैं. उनका ये भी कहना है कि महिलाएं रोज टाइम पर आती हैं, और कोई छुट्टी नहीं लेती हैं. जबकि ज्यादातर पुरुष हफ्ते में दो दिन छुट्टी करते हैं.

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बिना डेंगू के भी घट रहीं लोगों की प्लेटलेट्स! जानें क्या है वजह

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देश के कई हिस्‍सों में डेंगू की पुष्टि हुए बिना भी मरीजों में प्‍लेटलेट घटने की समस्‍या सामने आ रही है.

Platelets in dengue: डेंगू भी कोरोना की तरह काम करता है. जैसे कोरोना होने के कुछ दिन बाद फेफड़ों पर असर आता है या फिर बुखार ठीक होने के बाद ही शरीर में ऑक्‍सीजन स्‍तर कम होता है, ठीक उसी तरह डेंगू में भी बुखार ठीक होने के बाद प्‍लेटलेट गिरते जाने का सिलसिला शुरू होता है.

नई दिल्‍ली. देश में डेंगू बुखार अपना प्रकोप दिखा रहा है. दिल्‍ली-एनसीआर सहित कई राज्‍यों में डेंगू के मरीजों की संख्‍या रोजाना बढ़ रही है. मच्‍छर के काटने के बाद बुखार से शुरू होने वाली इस बीमारी में धीरे-धीरे मरीज की प्‍लेटलेट्स गिरने लगती हैं और वह अपने न्‍यूनतम स्‍तर से काफी नीचे पहुंच जाती हैं जिससे मरीज की जान जाने का खतरा पैदा हो जाता है. जिस तरह कोरोना में फेफड़ो पर असर पड़ता है उसी प्रकार डेंगू में प्‍लेटलेट्स पर खतरा मंडराता है. हालांकि हाल ही में कुछ ऐसे मामले भी देखे जा रहे हैं जिनमें मरीजों में डेंगू नहीं निकलता लेकिन उनकी प्‍लेटलेट गिर जाती हैं.

यूपी के कई इलाकों में आए ऐसे मामलों में देखा गया है कि मरीज की प्‍लेटलेट्स न्‍यूनतम संख्‍या डेढ़ लाख से भी घटकर 50 हजार तक पहुंच गई लेकिन जब डेंगू की जांच कराई तो उसमें इस बीमारी की पुष्टि नहीं हुई. जबकि मरीज को बुखार के साथ-साथ कमजोरी और डिहाइड्रेशन की परेशानी भी हुई. इस बारे में स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों का कहना है कि प्‍लेटलेट का गिरना डेंगू में ही संभव है. डेंगू के बिना प्‍लेटलेट किसी अन्‍य बीमारी में नहीं गिरती हैं.

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान दिल्‍ली के पूर्व निदेशक डॉ. एमसी मिश्र ने बताया कि जब भी कभी मरीज को डेंगू होता है तो उसे तेज बुखार आता है. इस दौरान अगर प्‍लेटलेट की जांच कराई जाए तो उनमें अंतर आए ये जरूरी नहीं लेकिन अगर मरीज का बुखार ठीक हो गया है या उतरता है और फिर चढ़ता है तो उसके एक हफ्ते के अंदर या उसके बाद प्‍लेटलेट गिरना शुरू होंगी. इस स्थिति में अगर किसी मरीज की डेंगू जांच कराई जाती है तो संभव है कि बुखार न होने पर वह नेगेटिव आए लेकिन प्‍लेटलेट गिरने का ही मतलब है कि उसको डेंगू होकर गुजर चुका है. लिहाजा आजकल डेंगू नेगेटिव होने पर प्‍लेट कम होने के मामले इसीलिए सामने आ रहे हैं.

डेंगू के एक हफ्ते तक ध्‍यान रखना बेहद जरूरी
डॉ. मिश्र कहते हैं कि इसका पैटर्न भी कोरोना की तरह है. जैसे कोरोना होने के कुछ दिन बाद फेफड़ों पर असर आता है या फिर बुखार ठीक होने के बाद ही शरीर में ऑक्‍सीजन स्‍तर कम होता है, ठीक उसी तरह डेंगू में भी बुखार ठीक होने के बाद प्‍लेटलेट गिरते जाने का सिलसिला शुरू होता है. ऐसे में जरूरी है कि डेंगू के मरीज के ठीक हो जाने के एक हफ्ते बाद तक उसका विशेष ध्‍यान रखा जाए और उसे भरपूर मात्रा में पानी पिलाया जाए और लिक्विड डाइट दी जाए ताकि उसके शरीर में पानी की कमी न हो.

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T20 World Cup: टेप बॉल ने बनाया पाकिस्तानी गेंदबाजों को खतरनाक, विश्व कप में मचा रहे धमाल, जानिए क्या भारत में भी होती है ‘बॉल टैपिंग’?

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नई दिल्ली. टी20 विश्व कप 2021 (T20 World Cup 2021) में पाकिस्तान की क्रिकेट टीम का प्रदर्शन अब तक शानदार रहा है. पाकिस्तान ने पहले भारत और फिर न्यूजीलैंड को आसानी से हराकर सेमीफाइनल में अपनी जगह लगभग पक्की कर ली है. भारत के खिलाफ मैच में जहां बाएं हाथ के तेज गेंदबाज शाहीन अफरीदी (Shaheen Afridi) चमके, तो वहीं दूसरे मैच में हारिस रऊफ (Haris Rauf) ने अपनी कहर बरपाती गेंदों से न्यूजीलैंड टीम की कब्र ही खोद दी. इस मैच में रऊफ ने 22 रन देकर 4 विकेट लिए थे. इसमें न्यूजीलैंड के ओपनर मार्टिन गुप्टिल (Martin Guptill) का विकेट खास था. क्योंकि रऊफ ने यह विकेट ‘टेप बॉल क्रिकेट’ में सीखी चालाकी के जरिए हासिल की.

हारिस रऊफ रावलपिंडी की एक दुकान पर सेल्समैन का काम करते हुए टेप बॉल क्रिकेट खेलते थे. इसी दौरान एक बार पीएसएल टीम लाहौर कलंदर्स के ट्रायल के लिए गए. उनकी रफ्तार ने सबको हैरान कर दिया. इसके बाद पाकिस्तान के दिग्गज तेज गेंदबाज रहे आकिब जावेद की उन पर नजर पड़ी और फिर हैरिस का करियर ही बदल गया. वो अकेले नहीं हैं जो टेप बॉल क्रिकेट से यहां तक पहुंचे हैं. भारत के मिस्ट्री स्पिनर वरुण चक्रवर्ती ने भी गली क्रिकेट से टीम इंडिया का सफर तय किया है. यह अलग बात है कि पाकिस्तान के खिलाफ मैच में उनका प्रदर्शन फीका रहा था. इसी वजह से टेप बॉल क्रिकेट से निकले इस स्टाऱ खिलाड़ी को आलोचना झेलनी पड़ी थी. उनका यह कहकर मजाक उड़ाया गया कि पाकिस्तान में तो गली-गली में टेप बॉल क्रिकेट खेली जाती है. इसलिए वरुण उनके लिए मिस्ट्री नहीं हैं.

रऊफ के जाल में उलझे मार्टिन गुप्टिल
हारिस रऊफ ने गुप्टिल को पहली गेंद 149 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से यॉर्कर फेंकी थी. रऊफ की यह यॉर्कर सीधे गुप्टिल के पैर के अंगूठे पर लगी और वो दर्द से छटपटाने लगे थे. रऊफ ने अगली गेंद लेंथ बॉल फेंकी. इसकी रफ्तार भी 148 किमी प्रति घंटा थी. गुप्टिल जब तक इस गेंद पर अपना बल्ला लाते. तब तक बॉल थाई पैड से टकराकर विकेट पर चली गई और बेल्स बिखर गए.

आखिर टेप बॉल क्या है ? इससे गेंदबाजी में कैसे मदद मिलती है? अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में गेंदबाजों को इससे क्या फायदा हो रहा है और क्यों पाकिस्तान क्रिकेट को इससे इतना फायदा हो रहा है?.चलिए जानते हैं इससे जुड़े सभी सवालों के जवाब..

टेप बॉल क्या है?
टी20 विश्व कप में पाकिस्तान के गेंदबाजों की सफलता के बाद टेप बॉल क्रिकेट अचानक से सुर्खियों में आ गया है. दरअसल, टेप-बॉल एक टेनिस बॉल है, जिसे बिजली के टेप में लपेटा जाता है. ऐसा गेंद को ज्यादा चिकना बनाने के लिए किया जाता है. टेप लगाने के बाद भी यह गेंद पारंपरिक लेदर बॉल से हल्की होती है.

टेप बॉल से गेंदबाजी में कैसे मदद मिलती है?
जब कोई गेंदबाज भारी गेंद यानी लेदर बॉल से गेंदबाजी करता है, तो उसकी आर्म स्पीड कम होती है. इसका सीधा सा मतलब गेंद की रफ्तार कम होना. लेकिन जब आप टेप बॉल जैसी हल्की गेंद से क्रिकेट खेलते हैं तो आपकी आर्म स्पीड बढ़ जाती है और इससे गेंद की रफ्तार में अच्छा-खासा इजाफा हो जाता है. हारिस रऊफ के मामले में भी ऐसा ही है. वो भी टेप बॉल क्रिकेट खेलकर ही अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे हैं. सिर्फ वही नहीं, शाहीन अफरीदी, वसीम अकरम और आकिब जावेद सब पाकिस्तान की गलियों में इसी तरह की क्रिकेट खेलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुंचे थे.

टेप-बॉल और लेदर बॉल की रफ्तार में कितना फर्क होता है ?
टेप बॉल सामान्य क्रिकेट बॉल की तुलना में हवा में 20 फीसदी तेजी से ट्रैवल करती है. इसका मतलब अगर कोई गेंदबाज 135 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकता है तो टेप बॉल क्रिकेट में गेंद की रफ्तार बढ़कर 155 किमी प्रति घंटा हो जाएगी. क्योंकि यह लेदर बॉल की तुलना में हल्की और छोटी होती है. यही वजह है कि टेप बॉल क्रिकेट से निकले पाकिस्तानी गेंदबाज अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी रफ्तार से बड़े-बड़े बल्लेबाजों को परेशान कर रहे हैं.

टेप बॉल गेंदबाज क्यों बेहतर यॉर्कर फेंकते हैं ?
अपने करियर की शुरुआती दौर में टेप बॉल से खेलने वाला गेंदबाज अच्छी यॉर्कर फेंकता है. न्यूजीलैंड के खिलाफ पिछले मैच में मार्टिन गुप्टिल पाकिस्तानी गेंदबाज हारिस रऊफ की जिस यॉर्कर पर चोटिल हुए थे. वो इसका सबूत है. ऐसा इसलिए होता है. क्योंकि टेप बॉल हल्की होती है. इस पर कोई सीम नहीं होती है. ऐसे में गेंदबाज अपनी रफ्तार और यॉर्कर से ही बल्लेबाज को परेशान कर सकता है और यही टेप बॉल गेंदबाज की सबसे बड़ी ताकत होती है.

टेप बॉल क्रिकेट खेलने वाले गेंदबाज क्यों साबित हो रहे असरदार ?
टेप बॉल से खेलने वाले गेंदबाज को गेंद को किस एंगल से रिलीज करना है, उसकी बेहतर समझ हो जाती है. क्रिकेट गेंद की तुलना में टेप बॉल हवा में ज्यादा तेजी से घूमती है. ऐसे में अगर कोई गेंदबाज हल्की गेंद पर नियंत्रण हासिल कर लेता है, तो प्रोफेशनल क्रिकेट में इस्तेमाल होने वाले गेंद को कंट्रोल करना उसके लिए बाएं हाथ का खेल हो जाता है.

टेप बॉल क्रिकेट रिवर्स स्विंग में कितनी मदद करता है
टेप बॉल क्रिकेट किसी भी गेंदबाज को रिवर्स स्विंग सीखने में काफी मदद करता है. क्योंकि टेप बॉल क्रिकेट गली-मोहल्लों या उबड़-खाबड़ मैदान पर खेला जाता है. ऐसे में गेंद पर लगी टेप जल्दी घिस जाती है. ऐसे में गेंदबाज टेप बॉल की एक साइड को चिकना और दूसरी को खुरदुरा बना देते हैं और यहीं से टेप बॉल भी रिवर्स स्विंग होने लगती है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी रिवर्स स्विंग का यही सिद्धांत काम करता है.

भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका में लोकप्रिय है टेप बॉल क्रिकेट
भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका में टेप बॉल क्रिकेट ज्यादा लोकप्रिय है. ऐसा इसलिए क्योंकि यहां हर जगह क्रिकेट मैदान, एकेडमी या ट्रेनिंग से जुड़ी सुविधाएं नहीं हैं. ऐसे में गली-मोहल्ले या आस-पास के छोटे मैदान पर ही बच्चे क्रिकेट खेलते हैं. वसीम अकरम, वकार यूनुस, लसिथ मलिंगा और भारत के मिस्ट्री स्पिनर वरुण चक्रवर्ती, अजंता मेंडिस जैसे गेंदबाज इसके उदाहरण हैं. यही वजह है दुनिया को भारत और पाकिस्तान से ही रिवर्स स्विंग, दूसरा और तीसरा जैसी गेंद फेंकने वाले खिलाड़ी मिले.

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सोनम कपूर से कंगना रनौत तक, जान‍िए क्‍यों शाहरुख खान के साथ काम के ऑफर को इन बड़ी हीरोइनों ने कहा NO

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शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) ने जो कामयाबी हासिल की है, उस कामयाबी को हासिल करना सभी एक्टर का सपना होता है. अपनी एक्टिंग से उन्होंने अपने फैंस के दिलों में खास जगह बनाई है. उनकी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर कामयाबी के झंडे गाड़े हैं. उन्होंने कई एक्ट्रेस के साथ काम किया है, लेकिन काजोल के साथ उनकी केमेस्ट्री को दर्शकों ने बेहद प्यार दिया. तकरीबन हर एक्ट्रेस की चाहत थी कि वो शाहरुख के साथ काम करें, मगर हेमा मालिन (Hema Malini), श्रीदेवी (Sridevi), करिश्मा कपूर (Karishma Kapoor) सोनम कपूर (Sonam Kapoor), कंगना रनौत (Kangna Ranaut) और साउथ की एक्ट्रेस सामंथा जैसी अभिनेत्रियों ने उनके साथ काम करने से साफ मना भी कर दिया था. (फोटो साभार Instagram @iamsrk/sonamkapoor)



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समीर वानखेड़े की पहली पत्नी के पिता बोले- अगर वे हिन्दू होते तो अपनी बेटी की शादी नहीं करता

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Aryan Khan Drugs Case: एनसीबी के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े पर मुंबई क्रूज ड्रग्स केस में वसूली के आरोपों के बीच कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं. इस बीच, समीर वानखेड़े की पहली पत्नी डॉक्टर शबाना कुरैशी के पिता डॉक्टर जाहिद कुरैशी ने एबीपी न्यूज़ के साथ एक्सक्लूसिव बात की. उन्होंने कहा कि ये मैरेज अरेंज थी न कि लव मैरिज. शादी से तीन-चार पहले हम एक दूसरे को जानते थे और यह जानते थे कि वह मुस्लिम है, उनका पूरा परिवार मुस्लिम है. उन्होंने कहा कि वे हमारे पास मुस्लिम बनकर आए थे.

जाहिद कुरैशी ने कहा कि उस वक्त समीर वानखेड़े यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे और नामज के लिए मस्जिद जाते थे. उन्होंने कहा कि ये अभी न्यूज़ में आने के बाद पता चला कि वह हिन्दू हैं. जाहिद ने कहा कि हमारी लड़की का तलाक होने के बाद हम अपने दुख को पी चुके थे. लेकिन, जब यह मामला न्यूज़ में आया उसके बाद बोलना पड़ा.

समीर की पहली पत्नी के पिता ने आगे कहा कि समीर वानखेड़े शादी के पहले के सार्टिफिकेट दिखा रहे हैं लेकिन जाहिदा से शादी के बाद के सार्टिफिकेट नहीं दिखा रहे हैं. उन्होंने कहा कि मुझे हमेशा से पता था कि हमारे समधि दाउद वानखेड़े हैं. जाहिद कुरैशी ने कहा कि जब शादी हुई तो वे मुस्लिम थे और सबको बता था. उन्होंने कहा कि उन्हें यह नहीं पता कि कौन से रिजर्वेशन कोटा तक तहत यूपीएससी में नौकरी पाई थी.

डॉ. जाहिद कुरैशी ने महाराष्ट्र सरकार के मंत्री के दावे के बारे में पूछे गए सवाल के बारे में कहा कि वह कुछ नहीं कहेंगे. उन्होंने कहा कि जब उनकी इज्जत के ऊपर बात आई तो प्रेस के सामने आना पड़ा. उन्होंने कहा कि हम बेटी के तलाक के बाद ही सबकुछ भूल चुके हैं. ऐसे में हम किसी तरह का उनके ऊपर एक्शन नहीं लेंगे.

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इंस्टाग्राम यूजर खुश हो जाएं! सभी के लिए जारी हुआ लिंक-शेयरिंग फीचर

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नई दिल्ली. इंस्टाग्राम ने एक ऐसा फीचर लॉन्च किया है जिसका इंतजार उसके यूजर बहुत लंबे समय से कर रहे थे. इंस्टाग्राम ने अपने यूजर्स को स्टोरीज में लिंक ऐड करने की अनुमति दे दी है. अब हर यूजर यदि वह चाहता है तो अपनी स्टोरीज में कोई भी लिंक जोड़ सकता है. इससे पहले यह फीचर केवल ऐप के वेरिफाइड यूजर्स या 10 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स वाले यूजर्स के लिए था.

इंस्टाग्राम ने अब अपने ट्वीट में यह जानकारी दी है कि अब स्टिकर के जरिए लिंक जोड़ने का फीचर इंस्टाग्राम के हर यूजर को दिया जाएगा और इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि यूजर का अकाउंट बड़ा या छोटा. इंस्टाग्राम का कहना है कि वैसे तो लिंक वाला फीचर हर यूजर के लिए जारी किया जा रहा है, लेकिन ये फीचर उन लोगों से छीना भी जा सकता है जो बार-बार गलत सूचनाएं और जानकारियां शेयर करेंगे या फिर किसी के लिए अपशब्दों का प्रयोग करेंगे.

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इंस्टाग्राम का मानना है कि बिजनेस करने वालों से लेकर साधारण लोगों तक सभी को इस लिंक स्टिकर से लाभ हो सकता है. इसलिए ‘स्वाइप अप’ के ऑप्शन की जगह इस फीचर को लाया गया है.

कैसे करें लिंक का इस्तेमाल
अगर आप यह सोच रहे हैं कि इस फीचर को किस तरह इस्तेमाल किया जा सकता है तो हम आपको इसका तरीका बताते हैं. इस फीचर को इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले इंस्टाग्राम एप को खोलें और फिर स्टोरी फीचर पर जाकर कोई स्टोरी क्रीएट करें. ऊपर बने नैविगेशन बार में आपको स्टिकर टूल दिखेगा, उस पर क्लिक करें और फिर दिए गए ऑप्शन्स में से लिंक स्टिकर पर क्लिक करें. यहां उस URL की जानकारी टाइप करें, जिसे आप शेयर करना चाहते हैं, फिर इसे अपनी स्टोरी में अपने हिसाब से प्लेस करें और शेयर कर दें.

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ASEAN-India Summit: पीएम मोदी बोले- कोरोना काल में भारत को सभी देशों से सहयोग मिला

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ASEAN-India Summit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने आज ब्रुनेई के सुल्तान हसनल बोलकिया के आमंत्रण पर 18वें दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों के संगठन आसियान-भारत सम्मेलन में हिस्सा लिया. इस दौरान सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कोविड 19 महामारी के कारण हम सभी को अनेक चुनौतियों से जूझना पड़ा, लेकिन ये चुनौतीपूर्ण समय भारत आशियान मित्रता की कसौटी भी रहा.

आसियान और भारत को शीर्ष स्तर पर संवाद का मौका प्रदान करता है सम्मेलन

बता दें कि यह सम्मेलन हर साल आयोजित किया जाता है जो आसियान और भारत को शीर्ष स्तर पर संवाद का मौका प्रदान करता है. प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल नवंबर में 17वें आसियान सम्मेलन में हिस्सा लिया था. इस बार पीएम मोदी 9वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया.  आसियान-भारत साझेदारी साझा भौगोलिक, ऐतिहासिक और सभ्यता के मजबूत आधारों पर आधारित है. आसियान समूह शुरू से भारत की ‘एक्ट इस्ट नीति’ और हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर व्यापक दृष्टिकोण का मूल केंद्र रहा है.

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इस तरह मुस्कुराना होता है इस खतरनाक बीमारी का पहला लक्षण, 4 घंटे के अंदर हॉस्पिटल ले जाना है जरूरी

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Brain Stroke Facts: हर साल 29 अक्टूबर को वर्ल्ड स्ट्रोक डे (world stroke day 2021) मनाया जाता है. अधिकतर लोग समझते हैं कि स्ट्रोक दिल की बीमारी है, लेकिन असल में यह दिमाग से जुड़ी होती है. कैंसर की तरह ही स्ट्रोक (आघात) के कारण भी हर साल कई मौतें हो रही हैं. मगर फिर भी लोगों को स्ट्रोक डिजीज के बारे में बहुत कम जानकारी (Brain stroke in hindi) होती है. इसलिए इस विश्व स्ट्रोक दिवस पर हम आपको स्ट्रोक से जुड़े फैक्ट्स बताने जा रहे हैं.

Brain Stroke: स्ट्रोक क्या होता है?

जेपी हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. मनीष गुप्ता के मुताबिक, स्ट्रोक को ब्रेन अटैक (brain attack) भी कहा जाता है. जिसमें दिमाग तक जाने वाला ब्लड फ्लो ब्लॉक हो जाता है या फिर दिमाग की रक्त वाहिका फट जाती है. स्ट्रोक होने के बाद समय पर चिकित्सीय मदद ना मिलने के कारण जान गंवाने का खतरा होता है. स्ट्रोक (दिमागी आघात) के मुख्यतः दो प्रकार होते हैं. जैसे-

  • इस्कीमिक स्ट्रोक (Ischemic stroke) – इस में दिमाग तक जाने वाला रक्त प्रवाह रुक जाता है. जिससे दिमाग की कार्य क्षमता पर गहरी आघात होता है.
  • हेमरेजिक स्ट्रोक (Hemorrhagic stroke) – इमें ब्रेन हेमरेज भी कहा जाता है. जिसमें दिमाग में कोई रक्त वाहिका फट जाती है और बलीडिंग होने लगती है.

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Stroke Symptoms: स्ट्रोक के लक्षण याद रखने का सबसे आसान तरीका

डॉ. मनीष गुप्ता, ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण (symptoms of brain stroke) याद रखने का सबसे आसान तरीका तरीका बताते हैं. जिसमें वह FAST नामक शॉर्ट फॉर्म याद करने के लिए कहते हैं.

F= Face drooping = व्यक्ति से मुस्कुराने के लिए कहें, इसमें चेहरे का एक हिस्सा निष्क्रिय या गिरा हुआ रहता है.

A= Arm weakness = व्यक्ति से दोनों हाथ उठाने के लिए कहें. इसमें एक हाथ नीचे की ओर गिरा रहेगा.

S= Speech difficulty = व्यक्ति से एक आसान-सा संवाद दोहराने के लिए कहें. इसमें शब्द साफ नहीं बोल पाते हैं.

T= Time to call = इन लक्षणों को दिखने पर तुरंत हॉस्पिटल ले जाएं. स्ट्रोक का इलाज एंबुलेंस के अंदर ही शुरू किया जा सकता है.

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जेपी हॉस्पिटल के डॉ. मनीष गुप्ता ने दिमागी आघात यानी ब्रेन स्ट्रोक से जुड़े कुछ फैक्ट्स के बारे में बताया.

  1. एक्सपर्ट के मुताबिक, स्ट्रोक किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है. लोगों को गलत लगता है कि यह सिर्फ बुजुर्ग लोगों में ही होता है. एक्सपर्ट के मुताबिक, खराब जीवनशैली और मोटापे के कारण 18 से 65 साल के किसी भी व्यक्ति को स्ट्रोक हो सकता है.
  2. लोगों को गलत लगता है कि स्ट्रोक की बीमारी कम होती है. फैक्ट यह है कि स्ट्रोक के मामले काफी आते हैं और कई देशों में यह खतरनाक दिमागी बीमारी काफी आम है.
  3. एक्सपर्ट के मुताबिक, स्ट्रोक से बचाव मुमकिन है. चूंकि, स्ट्रोक के मुख्य कारण ब्लड प्रेशर की समस्या, डायबिटीज और मोटापा होते हैं, इसलिए हेल्दी लाइफस्टाइल की मदद से इस बीमारी से बचाव किया जा सकता है.
  4. स्ट्रोक के कारण एक क्लॉट रह जाता है और लोगों को लगता है कि यह क्लॉट पूरी तरह ठीक नहीं हो सकता है. लेकिन ये स्ट्रोक मिथ (myth about stroke) है. क्योंकि, अगर मरीज में स्ट्रोक के लक्षण दिखने के सिर्फ 4 घंटे के अंदर हॉस्पिटल ले जाया जाए, तो डॉक्टर दिमागी नुकसान को बिल्कुल रिवर्स (उल्टा) कर सकता है.
  5. स्ट्रोक मिथ है कि यह आनुवांशिक नहीं होता है. जबकि स्ट्रोक का खतरा पीढ़ी दर पीढ़ी चल सकता है. हाइपरटेंशन और मोटापे की तरह ही स्ट्रोक भी हेरेडिटरी है. अगर किसी व्यक्ति को बहुत कम उम्र में स्ट्रोक आता है, तो इसका मतलब है कि इसके पीछे की वजह क्लॉटिंग डिसऑर्डर या कार्डिएक ट्यूमर हो सकता है, जो कि उन्हें पिछली पीढ़ी से मिला हो.

यहां दी गई जानकारी किसी भी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है. यह सिर्फ शिक्षित करने के उद्देश्य से दी जा रही है.





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Photos: नए घर में गर्लफ्रेंड के साथ मस्ती करते नजर आए माइकल क्लार्क, जमकर ले रहे मौज

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नई दिल्ली: ऑस्ट्रेलिया को साल 2015 वर्ल्ड कप की ट्रॉफी जिताने वाले पूर्व कप्तान माइकल क्लार्क इन दिनों अपनी निजी जिंदगी को लेकर चर्चा में हैं. माइकल क्लार्क अपने नए घर में गर्लफ्रेंड के साथ मस्ती करते नजर आए. बता दें कि माइकल क्लार्क ने साल 2019 में अपनी पत्नी काइली बोल्डी से तलाक ले लिया था. 

192 करोड़ रुपए में पत्नी से लिया था तलाक 

द ऑस्‍ट्रेलियन के मुताबिक क्‍लार्क और काइली का तलाक 40 मिलियन ऑस्‍ट्रेलियन डॉलर (करीब 192 करोड़ रुपए) में हुआ था. एक्स्ट्रा मैरेटियल अफेयर की वजह से ही क्लार्क ने अपनी पत्नी कायली से तलाक लिया था. 


13 मिलियन डॉलर में खरीदा नया घर 

माइकल क्लार्क ने 13 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर यानी करीब 73 करोड़ का नया घर सिडनी में खरीदा है, जिसमें वह अपनी गर्लफ्रेंड पिप एडवर्ड्स के साथ शिफ्ट हो गए हैं. डेलीमेल यूके ने अपनी एक रिपोर्ट में इस नए घर के बारे में जानकारी दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, सिडनी की पॉश कॉलोनी में मौजूद इस दो मंजिला घर में पांच बेडरूम, पांच बाथरूम और चार पार्किंग स्पेस हैं. इतना ही नहीं इस शानदार घर में लिविंग एरिया, मीडिया रूम, बड़ा किचन, स्टडी रूम और अन्य भी कई सुविधाएं मौजूद हैं. पूरा घर फ्रैंच दरवाजों और इंटीरियर से लैस है.

गर्लफ्रेंड के साथ मस्ती करते नजर आए क्लार्क

माइकल क्लार्क पिप एडवर्ड्स को डेट कर रहे हैं. माइकल क्लार्क ने हाल ही में पूल में एन्जॉय करते हुए अपनी एक तस्वीर भी पोस्ट की थी, जहां दूसरी ओर पिप एडवर्ड्स ने भी बिकिनी में अपनी तस्वीरें डाली हैं.


ऑस्ट्रेलिया के चैम्पियन कप्तान थे माइकल क्लार्क

माइकल क्लार्क ने ऑस्ट्रेलिया को आईसीसी वर्ल्ड कप 2015 का टाइटल जितवाया था. साथ ही वह टी-20 में ऑस्ट्रेलिया की तरफ से कप्तानी करने वाले पहले कप्तान हैं. अगस्त 2015 में क्लार्क ने क्रिकेट से संन्यास लिया था. क्लार्क ने 115 टेस्ट मैचों में 8643 रन, 245 वनडे मैचों में 7981 रन और 34 टी-20 मैचों में 488 रन बनाए है. इस दौरान क्लार्क ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कुल 36 शतक लगाए. क्लार्क अपने वक्त के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में गिने जाते हैं.





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