Dale Steyn Retired: जूते खरीदने के नहीं थे पैसे, खदान में काम करते थे पिता, जानिए डेल स्टेन की कहानी

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नई दिल्ली. मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है. सिर्फ पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है. ये पंक्तियां डेल स्टेन के क्रिकेट करियर पर बिल्कुल सटीक बैठती है. दुनिया के महान तेज गेंदबाजों में से एक डेल स्टेन (Dale Steyn) ने मंगलवार को संन्यास ले लिया. साउथ अफ्रीका के इस तेज गेंदबाज ने 17 साल के इंटरनेशनल करियर में विरोधी बल्लेबाजों को नाको चने चबवाए. क्या सचिन, क्या सहवाग, क्या हेडन और क्या रिकी पॉन्टिंग. जब डेल स्टेन शबाब पर थे तो दिग्गज बल्लेबाज भी उनके सामने फीके नजर आए. डेल स्टेन ने अपने करियर (Dale Steyn Career) में 699 विकेट झटके. उन्होंने 435 टेस्ट, 196 वनडे और 64 टी20 इंटरनेशनल विकेट अपने नाम किये. डेल स्टेन को महानतम तेज गेंदबाजो की लिस्ट में जगह मिलती है. उनकी रफ्तार और लेट स्विंग ने साउथ अफ्रीका को कई टेस्ट मैच जिताए. हालांकि डेल स्टेन ने अपने करियर में सफलता हासिल करने के लिए बहुत मेहनत की. डेल स्टेन एक बेहद ही गरीब परिवार में जन्मे थे. वो इतने गरीब थे कि उनके पास जूते खरीदने के भी पैसे नहीं थे. आइए आपको बताते हैं डेल स्टेन ने कैसे फर्श से अर्श तक का सफर तय किया.

डेल स्टेन के संघर्ष की कहानी (Dale Steyn Inspirational Story) जानने से पहले आप उनके कुछ आंकड़े जान लीजिये. डेल स्टेन ने सबसे ज्यादा 9 टेस्ट टीमों के खिलाफ पारी में पांच विकेट लेने का कारनामा किया है. डेल स्टेन 2343 दिनों तक दुनिया के नंबर 1 टेस्ट गेंदबाज रहे जो कि एक वर्ल्ड रिकॉर्ड है. डेल स्टेन ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सबसे ज्यादा 70 टेस्ट विकेट हासिल किये. न्यूजीलैंड के खिलाफ उन्होंने 68 और भारत के खिलाफ 65 शिकार किये. डेल स्टेन साउथ अफ्रीका की ओर से सबसे ज्यादा टेस्ट विकेट लेने वाले गेंदबाज भी हैं.

डेल स्टेन का संघर्ष
डेल स्टेन ने सालों तक टेस्ट क्रिकेट में अपनी धमक दिखाई लेकिन आपको बता दें उन्होंने कभी क्रिकेटर बनने के बारे में सोचा तक नहीं था. डेल स्टेन का परिवार जिम्बाब्वे से साउथ अफ्रीका में बसा था. हालांकि स्टेन का जन्म साउथ अफ्रीका के फालाबोरवा में ही हुआ था. स्टेन के पिता एक तांबा खदान में काम करते थे और उनका परिवार बेहद गरीब था. स्टेन नहीं चाहते थे कि वो तांबा खदान में काम करें इसलिए उन्होंने हर हाल में गांव छोड़ने का फैसला किया. एक इंटरव्यू में स्टेन ने बताया था कि वो अपने गांव में रहकर कुछ नहीं कर सकते थे इसलिए वो किसी तरह अपने गांव से 350 मील दूर जोहान्सबर्ग आ गए और वहां वो एक हॉस्टल में रहे. स्कूल में रहकर डेल स्टेन क्रिकेट भी खेलने लगे और वो अपने साथी खिलाड़ियों से काफी तेज गेंदबाजी करते थे. हाईस्कूल खत्म करने के बाद स्टेन ने क्रिकेट एकेडमी ज्वाइन की जिसका नाम लेसोथो था. वहां उन्हें प्रीटोरिया की बड़ी क्रिकेट एकेडमी में जाने की सलाह मिली.
प्रीटोरिया की क्रिकेट एकेडमी में उनकी गेंदबाजी में गजब का सुधार हुआ और वो दूसरे सभी गेंदबाजों से अलग थे. साउथ अफ्रीका के पूर्व बल्लेबाज डैरेन कलिनन ने स्टेन को गेंदबाजी करते देखा और वो उनसे बेहद प्रभावित हुए. कलिनन ने उन्हें फैंटम्स प्रोविंस टीम में जगह दिलवाई. स्टेन ने 2003 में पहला फर्स्ट क्लास मैच खेला और सिर्फ 7 मैचों के बाद ही उन्हें 2004 में टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू का मौका मिला. पोर्ट एलिजाबेथ टेस्ट खेलने के लिए डेल स्टेन ने 1000 किमी. का सफर बस से तय किया. डेल स्टेन ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब उन्हें टेस्ट टीम में चुना गया तो वो इसके लिए तैयार नहीं थे. उनके अंदर परिपक्वता नहीं थी. स्टेन ने बताया कि उनके अंदर गांव का बच्चा ही था जो झाड़ियों में नंगे पांव दौड़ता, मछलियां पकड़ता और जानवरों के साथ खेलता था. मानसिक तौर पर वो इंटरनेशनल क्रिकेट के लिए तैयार नहीं थे.

डेल स्टेन ने शॉन पॉलक से मांगे जूते
डेल स्टेन ने अपना पहला इंटरनेशनल मैच खेलने के लिए शॉन पॉलक से जूते मांगे थे. स्टेन ने इंडिपेंडेंट को दिये इंटरव्यू में बताया था कि उनके पास डेब्यू के वक्त सिर्फ एक जोड़ी जूते थे. वो नए जूते नहीं खरीद सकते थे. इसके बाद उन्होंने शॉन पॉलक से एक जोड़ी जूते मांगे और पूर्व साउथ अफ्रीकी कप्तान और तेज गेंदबाज ने उनकी मदद भी की. डेल स्टेन ने साल 2004 में डेब्यू किया और वो 2 टेस्ट में 6 विकेट ले सके. 2005 में उन्हें सिर्फ एक ही टेस्ट मैच में मौका मिला. लेकिन 2006 से उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट में अपनी धमक दिखाई. स्टेन ने 2006 में 6 टेस्ट में 24, 2007 में 7 टेस्ट में 44 विकेट चटकाए. 2008 में स्टेन ने 13 टेस्ट में 74 विकेट तोड़ कमाल ही कर दिया. इसके बाद स्टेन 2343 दिन तक नंबर 1 टेस्ट गेंदबाज रहे.

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