Death Anniversary: उस्ताद बिस्मिल्लाह खां ने फिल्मों के लिए भी बजाई थी शहनाई, जानें दिलचस्प किस्से

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नई दिल्लीः दुनिया को शहनाई (Bismillah Khan Shehnai) की सुरीली तान से परिचय कराने वाले उस्ताद बिस्मिल्लाह खां (Bismillah Khan) किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. उन्होंने अपना पूरा जीवन संगीत-साधना में लगाया था. वे अपनी शहनाई को बेगम कहते थे और उसी के साथ 21 अगस्त 2006 को इस दुनिया से रुखसत हुए थे. आइए, आज उनकी पुण्यतिथि (Bismillah Khan Death Anniversary) में उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ खास किस्सों को जानें.

उस्ताद बिस्मिल्लाह शुरू से संगीत से भरे माहौल में पले-बढ़े थे. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनका जन्म बिहार में हुआ था. उन्हें बिस्मिल्लाह नाम उनके दादा ने दिया था. कहा जाता है कि जब उनका जन्म हुआ था, तब बरबस ही उनके दादा के मुंह से बिस्मिल्लाह निकल गया था. तब से उनका नाम बिस्मिल्लाह पड़ गया था. एक बार जब वे ईद मनाने बनारस अपने मामा के घर गए तो वहीं के बनकर रह गए. उनके मामा अली बख्श एक मंदिर में शहनाई बजाते थे. तब बिस्मिल्लाह भी उनके साथ होते थे. इस तरह शहनाई से उनका रिश्ता कायम हुआ.

वे एक असाधारण शहनाई वादक थे, जो शास्त्रीय धुनों को बड़ी सहजता के साथ शहनाई पर बजाते थे. कई बड़े नेताओं के अलावा फिल्म अभिनेता भी उनकी शहनाई वादन के मुरीद थे. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इंदिरा गांधी उनकी शहनाई सुनने के लिए, अक्सर उन्हें आमंत्रित किया करती थीं. उन्होंने कई फिल्मों के लिए भी शहनाई की धुनें छेड़ी थीं. वे सत्यजीत रे की फिल्म ‘जलसाघर’ के लिए शहनाई बजाई थी. इसके अलावा, उन्होंने हिन्दी फिल्म ‘गूंज उठी शहनाई’ और आशुतोष गोवारिकर की फिल्म ‘स्वदेश’ के लिए भी मधुर तान छेड़ी थी.

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उस्ताद बिस्मिल्लाह खां को संगीत में उनके योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया था. उन्हें 2001 में भारत रत्न ने सम्मानित किया गया था.

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