देश को पीटी ऊषा देने वाले मशहूर कोच ओ एम नांबियार का निधन, एथलीट ने जताया दुख

0
15

[ad_1]

कोझिकोड. भारत को पी टी ऊषा जैसी सर्वश्रेष्ठ ट्रैक एवं फील्ड स्टार देने वाले प्रसिद्ध कोच ओ एम नांबियार का उम्र संबंधी बीमारियों के कारण गुरुवार को निधन हो गया. वह 88 वर्ष के थे. नांबियार के परिवार में उनकी पत्नी लीला, तीन पुत्र और एक पुत्री है. उन्होंने कोझिकोडा जिले वडाकरा स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली. सबसे पहले द्रोणाचार्य पुरस्कार हासिल करने वाले प्रशिक्षकों में से एक और इस साल पदमश्री पुरस्कार पाने वाले नांबियार को लगभग एक सप्ताह पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इसके बाद हालांकि उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी थी. नांबियार पर्किन्सन की बीमारी से पीड़ित थे.

पीटी ऊषा ने बताया कि उन्हें 10 दिन पहले दिल का दौरा पड़ा था. उन्होंने इसे निजी क्षति करार दिया. उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा, ”यह मेरे लिए बहुत बड़ी क्षति है. वह मेरे लिए पिता समान थे और यदि वह नहीं होते तो मैं इतनी उपलब्धियां हासिल नहीं कर पाती. नीरज चोपड़ा के ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने के बाद मैं पिछले सप्ताह ही उनसे मिली थी. मैं क्या बोल रही हूं वह समझ रहे थे लेकिन वह बात नहीं कर पा रहे थे.”

कुश्ती सहित 2 खेलों को गोद लेने के साथ UP में स्पोर्ट्स पर सीएम योगी के 5 बड़े ऐलान

पूर्व वायु सैनिक नांबियार ने कोच के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान ऊषा सहित कई अंतरराष्ट्रीय एथलीट तैयार किए. ऊषा लॉस एंजिल्स ओलंपिक 1984 में मामूली अंतर से कांस्य पदक से चूक गई थी. ऊषा ने बाद में भी अपने कोच से करीबी संपर्क रखा था और वह पिछले सप्ताह ही उन्हें यह बताने के लिए गई थी भाला फेंक के एथलीट चोपड़ा ने टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता है. ऊषा के अलावा उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले जिन एथलीटों को तैयार किया उनमें शाइनी विल्सन (चार बार की ओलंपियन और 800 मीटर में 1985 की एशियाई चैंपियनशिप की स्वर्ण पदक विजेता) और वंदना राव प्रमुख हैं.

नांबियार का जन्म 1932 में कन्नूर में हुआ था. बाद में वह वायुसेना से जुड़ गए थे, जिसमें उन्होंने 15 वर्ष तक सेवा की. वह 1970 में सार्जेंट के पद से सेवानिवृत हुए थे. उन्होंने राष्ट्रीय खेल संस्थान पटियाला से कोचिंग में डिप्लोमा लिया और सेना के एथलीटों को प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया. पदमश्री के लिए चुने जाने पर नांबियार ने कोझिकोड में अपने आवास पर पीटीआई से बातचीत में कहा था, ”यह पुरस्कार पाकर मैं खुश हूं हालांकि यह मुझे काफी पहले मिल जाना चाहिए था लेकिन मैं तब भी खुश हूं. कभी नहीं से देर भली.”

लियोनल मेसी के बेशकीमती आंसू! जिस टिशू पेपर से पोंछे, उसकी कीमत हो गई करोड़ों

ऊषा को 1985 में पदम श्री से सम्मानित किया गया था जबकि नांबियार को उस वर्ष द्रोणाचार्य पुरस्कार मिला था. उन्हें देश का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पाने के लिए अगले 36 वर्षों तक इंतजार करना पड़ा. उन्होंने कहा था कि जब ऊषा लॉस एंजिल्स में पदक से चूक गई थी तो वह लगातार रोते रहे. नांबियार ने 1968 में कोचिंग का डिप्लोमा लिया था और वह 1971 में केरल खेल परिषद से जुड़े थे. ऊषा ने 1977 में एक चयन ट्रायल में दौड़ जीती थी, जिसके बाद नांबियार ने उन्हें प्रशिक्षित किया था.

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here