क्या है जीनोम सीक्वेंसिंग, भारत में कैसे नए स्ट्रेन का इसके जरिए लगाया जा रहा पता

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भारत में कोरोना के 6 नए स्ट्रेन सामने आने के बाद हड़कंप मचा हुआ है. सरकार ने इसके बाद सख्ती बरतते हुए कई कदम उठाए हैं. केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि 9 दिसंबर से 22 दिसंबर तक विदेश से यात्रा कर आए सभी वो लोग जिनमें लक्षण पाए गए या फिर जिनकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई उन सभी का जीनोम सीक्वेसिंग कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि देशभर में अब कोरोना के सक्रिय मामले 2 लाख 70 हजार से भी कम है और इसमें गिरावट आ रही है. पिछले हफ्ते के दौरान पॉजिटिविटी रेट सिर्फ 2.25 फीसदी रही.

देशभर में जीनोम सिक्वेंसिंग के 10 लैब

ब्रिटेन में कोरोना के नए स्ट्रेन सामने आने से पहले ही 5 हजार लोगों का जिनोम सीक्वेंसिंग कराया जा चुका है. केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने बताया कि देशभर में जीनोम सीक्वेंसिंग को लेकर 10 लैब बनाए गए हैं और आने वाले दिनों में और अधिक जीनोम सिक्वेंसिंग आपसी तालमेल के साथ किया जाएगा.

क्या है जीनोम सीक्वेंसिंग

दरअसल, आसान शब्दों में कहा जाए तो जीनोम सीक्वेंसिंग एक तरह से किसी वायरस का बायोडाटा होता है. कोई वायरस किस तरह का है, किस तरह का वह दिखता है, इन सभी चीजों की जानकारी हमें जीनोम के जरिए मिलती है. इसी वायरस के विशाल समूह को जीनोम कहा जाता है. वायरस के बारे में जानने की विधि को जीनोम सीक्वेंसिंग कहते हैं. इससे ही कोरोना के नए स्ट्रेन के बारे में पता चला है.

देश में इस वक्त जीनोम सीक्वेंसिंग के 10 ही लैब है, जहां से इसके बारे में पता लगाया जाता है. इनमें- इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (नई दिल्ली), CSIR-आर्कियोलॉजी फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (हैदराबाद), DBT – इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज (भुवनेश्वर), DBT-इन स्टेम-एनसीबीएस (बेंगलुरु), DBT – नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल जीनोमिक्स (NIBMG), (कल्याणी, पश्चिम बंगाल), ICMR- नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (पुणे) के लैब शामिल हैं.

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