ब्रह्मोस का समंदर में सफल परीक्षण, नौसेना को लंबी दूरी पर जमीन पर हमला करने में मिलेगी मदद

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नई दिल्ली: भारत के प्राइम-स्ट्राइक वैपेन, ब्रह्मोस ने रविवार को एक और सफल परीक्षण किया. ये परीक्षण एक स्वदेशी युद्धपोत से किया गया जिसमें ब्रह्मोस मिसाइल ने समुद्र में सफलतापूर्वक अपने लक्ष्य को निशाना बनाया. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का अरब सागर में भारतीय नौसेना के स्वदेशी स्टील्थ डेस्ट्रॉयर (युद्धपोत), आईएनएस चेन्नई से सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया. मिसाइल ने उच्च-स्तरीय एवं अत्यधिक जटिल युक्तियों का प्रदर्शन करने के बाद सटीकता के साथ सफलतापूर्वक लक्ष्य को भेदा.

रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा,  “एक ‘प्रमुख मारक अस्त्र’ (प्राइम स्ट्राइक वैपेन) के रूप में ब्रह्मोस  नौसेना को लंबी दूरी पर जमीन पर टारगेट को पूरा करने में मदद देगी और  डेस्ट्रॉयर को भारतीय नौसेना का एक घातक युद्धपोत बना देगी.” आपको बता दें कि ब्रह्मोस को भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से डिजाइन, विकास एवं निर्मित किया गया है.

ब्रह्मोस का आईएनएस चेन्नई ये ये दूसरा सफल परीक्षण है. इससे पहले 2017 में ब्रह्मोस का वॉरशिप से सफल टेस्ट किया गया था. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल प्रक्षेपण के लिए डीआरडीओ, ब्रह्मोस और भारतीय नौसेना को बधाई दी.

डीआरडीओ के प्रमुख डॉ. जी सतीश रेड्डी ने भी इस बड़ी उपलब्धि के लिए वैज्ञानिकों तथा डीआरडीओ, ब्रह्मोस भारतीय नौसेना एवं उद्योग के सभी कार्मिकों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस मिसाइलें कई प्रकार से भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमताओं में वृद्धि करेंगी.

ब्रह्मोस मिसाइल भारत के उन चुनिंदा हथियारों (मिसाइलों) में से एक है जिसे थलसेना, वायुसेना और नौसेना तीनों ही इस्तेमाल करती हैं. वायु‌‌सेना के फ्रंटलाइन एयरक्राफ्ट, सुखोई में भी ब्रह्मोस मिसाइल को इंटीग्रेट कर दिया गया है. थलसेना की आर्टलरी यानि तोपखाना भी ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल करता है. चीन से चल रही तनातनी के बीच भारतीय सेना ने ब्रह्मोस मिसाइल को एलएसी पर तैनात कर रखा है.

इस‌ बीच खबर है कि सोमवार से भारत और श्रीलंका की नौसेनाएं ट्रिंकोमाली से सटे समुद्र में तीन दिवसीय (19-21 अक्टूबर) तक साझा युद्धभ्यास करेंगी. इस युद्धभ्यास में भारतीय नौसेना के दो युद्धपोत, आईएनएस कमोर्ता और किलटन हिस्सा ले रहे हैं जबकि श्रीलंका का ऑफशोर पैट्रोल वैसेल, ‌सयूरा और ट्रेनिंग शिप, गजबाहु हिस्सा ले रहा है. इसके अलावा नौसेना के दो हेलीकॉप्टर, एएलएच ‌‌और चेतक भी हिस्सा लेंगे.

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