बिहार विधानसभा चुनाव: देश की राजनीति में महत्व रखने वाले समस्तीपुर में क्या माहौल है?

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समस्तीपुर: हिंदुस्तान की राजनीति में समस्तीपुर का बड़ा महत्व है. कर्पूरी ठाकुर का जन्म यहीं हुआ था. उन्होंने सबसे पहले पिछड़ों को आरक्षण दिया जिसने राजनीति बदल दी. लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा भी यहीं रोकी गई थी. समस्तीपुर और आस पास के इलाक़ों में इस तरह के मैथिली लोक गीत खूब गाए और सुनाए जाते हैं. शादी विवाह से लेकर चुनाव प्रचार तक में मौक़ा चाहे जो हो.

बिहार के चुनावी बयार में मास्क ग़ायब हो गया है. अब तो बस कौन जीतेगा और कौन हारेगा? लोग इसी बहस में उलझे रहते हैं. मॉर्निंग वॉक पर निकले लोग भी कुछ कम नहीं हैं. पहले योग फिर थोड़ा एक्सरसाइज़ और फिर चुनावी चर्चा करते हैं. सुशांत के बिना बात ख़त्म नहीं होती है. बिहार में नीतीश कुमार जिसके साथ गए. राज्य में सरकार हर बार उसकी ही बनती है. पिछले पंद्रह सालों से ऐसा ही होता रहा है.

समस्तीपुर के कर्पूरी ठाकुर दो बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे. 1979 में ही उन्होंने पिछड़ों के लिए अलग और अति पिछड़ों के लिए अलग आरक्षण की व्यवस्था कर दी थी. कर्पूरी बाबू को नीतीश अपना राजनैतिक गुरू मानते रहे हैं.

बिहार का पिछला तीस साल लालू यादव और नीतीश कुमार के नाम रहा है. दोनों ही नेता कर्पूरी ठाकुर को अपना गुरू बताते हैं. पतौझियां गांव में लालू-नीतीश के गुरू कर्पूरी ठाकुर का जन्म हुआ था. अब ये कर्पूरी ग्राम कहलाता है. यहां आकर पता चला कि चिराग़ पासवान भी एक फ़ैक्टर हैं.

लालू यादव के बड़े लाल मतलब तेज प्रताप यादव अब समस्तीपुर पहुंच गए हैं. वे इस बार यहां की हसनपुर सीट से चुनाव लड़ेंगे. वे लगातार रोड शो कर रहे हैं. पिछली बार वे वैशाली के महुआ से विधायक बने थे. उनके विरोधी कहते हैं कि पत्नी ऐश्वर्या के डर से तेज ने महुआ छोड़ दी.

ऐश्वर्या के पिता और विधायक चंद्रिका राय अब जेडीयू में शामिल हो गए हैं. नीतीश भी मंच से ऐश्वर्या की तारीफ़ कर चुके हैं. अगर वे अपने पति तेज प्रताप के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ती हैं तो मुक़ाबला दिलचस्प होगा. कहा जाता है कि तेज प्रताप यादव ने अपने लिए हसनपुर के रूप में सुरक्षित सीट ढूंढ ली है. ऐसा लग भी रहा है. समस्तीपुर पिछड़ों और दलितों के दबदबे वाला इलाक़ा रहा है. यादवों के साथ साथ अति पिछड़ी जाति के लोगों की अच्छी ख़ासी आबादी है. यहां लोकसभा की दो सीटें हैं.

कोरोना से लेकर कई मुद्दों पर चिराग़ पासवान लगातार नीतीश सरकार का विरोध करते रहे हैं. पार्टी 143 सीटों पर चुनाव लड़ने का दम भर रही है. जेडीयू कभी चिराग़ को कालिदास बताती है तो कभी कहती है कि जब नीतीश पहली बार विधायक बने थे तब वे बस तीन साल के थे.

लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि चिराग़ एनडीए में ही बने रहेंगे. तेजस्वी यादव बनाम नीतीश कुमार की इस लड़ाई में इस बार किसका पलड़ा भारी है. एक गांव में बहस शुरू हो गई. नीतीश राज में समस्तीपुर में एक मेडिकल कॉलेज बनना शुरू हो गया है. नीतीश कुमार ने एक इंजीनियरिंग कॉलेज का भी शिलान्यास किया है.

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