डीन जोंस; ऐसे ऑस्ट्रेलियाई जिसका ‘असली जन्म’ भारत में हुआ था

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इसे अजीब इत्तेफाक ही कहा जाएगा कि डीन जोंस (Dean Jones) की मौत उस भारत-भूमि में हुई, जिसने क्रिकेट के मैदान पर उन्हें ‘असली जन्म’ दिया था. ऑस्ट्रेलिया के इस धुरंधर बल्लेबाज़ के बारे में कोई भी बात 1986 में उनके चेन्नई टेस्ट में दोहरे शतक के बगैर पूरी ही नहीं हो सकती है, जिसे बनाने के दौरान वो मैदान में लगातार उल्टिंया करते हुए दिखे और बाद में उन्हें अस्पताल में सलाईन चढ़वाने की तक नौबत आ पड़ी.

Source: News18Hindi
Last updated on: September 24, 2020, 7:13 PM IST

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24 मार्च 1961 को मेलबर्न में जन्मे डीन जोंस के निधन की ख़बर 24 सितंबर 2020 को मुंबई से आई तो क्रिकेट जगत में मायूसी और शोक के साथ-साथ ज़बरदस्त हैरानी भी हुई. इसे अजीब इत्तेफाक ही कहा जाएगा कि जोंस की मौत उस भारत-भूमि में हुई, जिसने क्रिकेट के मैदान पर उन्हें ‘असली जन्म’ दिया था. ऑस्ट्रेलिया के इस धुरंधर बल्लेबाज़ के बारें में कोई भी बात 1986 में उनके चेन्नई टेस्ट में दोहरे शतक के बगैर पूरी ही नहीं हो सकती है. पूरे करियर में जोंस ने 52 टेस्ट खेले और 11 शतक बनाए लेकिन उनकी सबसे बड़ी पहचान भारत के ख़िलाफ भारत में ही बनाया गया हो अभूतपूर्व दोहरा शतक रहा जिसे बनाने के दौरान वो लगातार मैदान में उल्टिंया करते हुए दिखे और बाद में उन्हें अस्पताल में सलाईन चढ़वाने की तक नौबत आ पड़ी.

खुशमिज़ाज, बातूनी, मज़ाकिया, यारों का यार वैसे जैसे शब्द हैं जिसका इस्तेमाल अक्सर उनके साथी खिलाड़ी और कामेंटेटर करते रहे हैं. लेकिन, जोंस इससे ज़्यादा बढ़ी शख्सियत थे. क्रिकेट संन्यास लेने के बाद जोंस ने कामेंट्री का रुख़ किया और भारत में एक निजी टीवी चैनल के लिए क्रिकेट एक्सपर्ट भी बने. प्रोफेसर के अंदाज़ में क्रिकेट की बातों को ब्लैकबोर्ड पर समझाने की उनकी अदा ने उन्हें भारत के कई युवा फैंस को नई सदी में उनका फैन बनाया.

डीन जोंस के विचार अक्सर ‘क्रांतिकारी’ और अनोखे हुआ करते थे. और हो भी क्यों ना! एक खिलाड़ी के तौर डीन जोंस ने वन-डे क्रिकेट में बल्लेबाज़ी की एक नई शब्दावली गढ़ी. आक्रामक अंदाज़ में पिच से बाहर निकलर तेज़ गेंदबाज़ों के ख़िलाफ शॉट लगाने का जोखिम से लेकर असाधारण रनिंग बिटविन द विकेट का पाठ क्रिकेटर के तौर पर जोंस की सबसे बड़ी विरासत है जिसकी झलक आपको आज विराट कोहली जैसे खिलाड़ी में भी देखने को मिलती है.

1994 में वन-डे क्रिकेट को अलविदा कहने वाले जोंस अगर आज भी उस फॉर्मेट में सबसे बेहतरीन औसत रखने वाले टॉप 33 खिलाड़ियों में शुमार हैं तो आप अंदाज़ा लगा लिजिए कि वो वक्त से कितना आगे चलने वाले बल्लेबाज़ों में से थे. ज़हीर अब्बास, विवियन रिचर्ड्स, ग्लेन टर्नर और गोर्डन ग्रीनिज सरीखे दिग्गज ही इस सूची में उनसे आगे हैं जिन्होंने 1994 से पहले वन-डे क्रिकेट को अलवा कहा. पिछले 25 सालों में तो वन-डे क्रिकेट तो इतनी तेज़ी से बदली है कि आपको रोज़ औसत और स्ट्राइक रेट के मामले में नये खिलाड़ियों के दर्शन होते हैं. अगर ऐसी भीड़ में भी कोई खिलाड़ी अपना वजूद बनाये रखने में कामयाब है तो वो ख़ास ही रहा होगा.

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डीन जोंस क्रिकेट इतिहास में अपनी ख़ास छाप छोड़ने के चलते हमेशा नॉट आउट ही रहेंगे.

आपको शायद ये बात पता नहीं हो कि जोंस को टीम से निकाला नहीं गया. जब उन्हें लगा कि वकत् गो चुका है तो उन्होंने खुद क्रिकेट छोड़ दी. पिछले ही महीन चेन्नई सुपर किंग्स के बल्लेबाज़ शेन वॉटसन के साथ इटंरव्यू दौरान जोंस ने खुलासा किया 1994 साउथ अफ्रीका सीरीज़ के दौरान जैसे ही उन्हें ये एहसास हुआ कि टीम मैनेजमेंट मार्क टेलर और डेविड बून को उनसे बेहतर बल्लेबाज़ मान रही है तो उन्होंने कहा बहुत बहुत शुक्रिया. और छोड़ दी क्रिकेट. जबकि उस सीरीज़ में भी अपनी साख के लिहाज़ से बल्लेबाज़ी नहीं करने के बावजूद जोंस के आकंड़े टेलर-बून से ख़राब नहीं थे.

1987 में भारतीय ज़मीं पर पहली बार ऑस्ट्रेलिया ने जब वर्ल्ड कप जीता तो ओपनर डेविड बून और ज्यौफ मार्श के बाद सबसे ज़्यादा रन अपनी टीम के लिए जोंस ने ही बनाये. भारत-भूमि हमेशा से ही जोंस को रास आयी. जोंस ने कोचिंग में भी हाथ आजमाये लेकिन जो लोकप्रियता उन्हें कामेंटेटर के तौर पर भारत में मिली, वो उन्हें उनके मुल्क ऑस्ट्रेलिया में भी नहीं मिल पायी क्योंकि जोंस को कभी भी मशहूर चैनल 9 में नियमित तौर पर कामेंट्री करने का मौका नहीं दिया गया.स्टार स्पोर्ट्स के ‘डग आउट’ से आईपीएल की कामेंट्री करते हुए जोंस का अचानक इस तरह से जीवन से आउट होना बेहद अफसोसजनक रहा. लेकिन, जोंस क्रिकेट इतिहास में अपनी ख़ास छाप छोड़ने के चलते हमेशा नॉट आउट ही रहेंगे.

शुक्रिया डीन जोंस. ईश्वर आपकी आत्मा को शांति दे.
(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं.)


ब्लॉगर के बारे में

विमल कुमार

न्यूज़18 इंडिया के पूर्व स्पोर्ट्स एडिटर विमल कुमार करीब 2 दशक से खेल पत्रकारिता में हैं. Social media(Twitter,Facebook,Instagram) पर @Vimalwa के तौर पर सक्रिय रहने वाले विमल 4 क्रिकेट वर्ल्ड कप और रियो ओलंपिक्स भी कवर कर चुके हैं.

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First published: September 24, 2020, 7:13 PM IST





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